लाल बत्ती पर गाड़ी रुकते ही नन्हे-नन्हे हाथ आपकी खिड़की तक पहुँच जाते हैं। कोई फूल बेचता है, कोई खिलौने, तो कोई मदद की उम्मीद में हाथ फैलाता है। इन मासूम चेहरों के पीछे छिपी होती है एक ऐसी कहानी, जिसमें बचपन की मुस्कान से ज्यादा जिम्मेदारियों का बोझ है। लेकिन सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि ये बच्चे सिग्नल पर क्यों खड़े हैं, सवाल यह भी है कि क्या उन्हें शिक्षा, पोषण, सुरक्षित बचपन और बेहतर भविष्य का अधिकार मिल पा रहा है? बचपन सड़कों पर नहीं, स्कूलों में होना चाहिए। आइए, बाल श्रम और बाल भिक्षावृत्ति के प्रति जागरूक बनें। बच्चों को भीख देने के बजाय उनके पुनर्वास, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन के प्रयासों का समर्थन करें। क्योंकि हर बच्चे का हक है – एक सुरक्षित बचपन और बेहतर भविष्य!