आप आए दिन अखबारों और समाचार माध्यमों में ऐसी खबरें पढ़ते होंगे कि किसी बुजुर्ग या बुजुर्ग दंपति ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लाखों रुपये गँवा दिए। किसी को बैंक अधिकारी बनकर फोन किया गया। किसी को बताया गया कि उसके नाम से भेजे गए पार्सल में प्रतिबंधित सामान मिला है। किसी को पुलिस, सीबीआई या प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी का अधिकारी बनकर डराया गया। और अंत में, लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई ठगों के हवाले कर दी। सबसे चिंताजनक बात यह है कि साइबर ठगी के शिकार केवल कम पढ़े-लिखे या तकनीक से अनजान लोग नहीं होते। पढ़े-लिखे, नौकरीपेशा, कारोबारी और अनुभवी नागरिक भी इसके शिकार बन रहे हैं।