आपने अक्सर देखा होगा—सड़क पर मोटरसाइकिल दौड़ रही है और उस पर बैठा युवक बार-बार मोबाइल स्क्रीन देख रहा है। सामने ट्रैफिक है, फिर भी उसे जल्दी है, क्योंकि हर ऑर्डर उसकी कमाई है। इसी कमाई से घर का राशन, बच्चे की फीस, किराया, बाइक की किस्त और अगले दिन का पेट्रोल निकलता है। वह अकेला नहीं है। ऐसे हजारों युवक हमारी सुविधा को घर तक पहुँचाने के लिए हर दिन सड़कों पर दौड़ते हैं। यही वह दुनिया है जिसे हम अपनी “डिजिटल सुविधा” की चमक में अक्सर नहीं देख पाते। ये डिलीवरी कर्मी हमारी नई अर्थव्यवस्था का सबसे कम समझा गया चेहरा हैं।