15 अगस्त 1947... एक ऐसी तारीख जिसने भारत का इतिहास बदल दिया। करीब दो सौ वर्षों के औपनिवेशिक शासन के बाद भारत आज़ाद हुआ। उस पीढ़ी के लिए आज़ादी का अर्थ था— अपनी जमीन पर अपना शासन। अपनी सरकार चुनने का अधिकार। अपनी आवाज़ रखने का अधिकार। और अपने भविष्य का फैसला खुद करने का अधिकार। लेकिन 79 साल बाद एक सवाल फिर हमारे सामने है— क्या हम सिर्फ एक देश के रूप में आज़ाद हुए थे... या एक नागरिक के रूप में भी? 2026 में जब हम तिरंगा फहराते हैं, तो क्या हमें सिर्फ यह पूछना चाहिए कि देश कितना आगे बढ़ा? या यह भी पूछना चाहिए—